मैं समझता था उन्हें आह ! हक़ीक़त वाले ।।

झूठ थे , जितने थे ख़त उसके मोहब्बत वाले ।।1।।

देखने में तो मसीहा की तरह लगता था ,

काम करता था मगर सिर्फ़ सफ़ाहत वाले ।।2।।

बात करता था हमेशा ही वो जीने वाली ,

दिल में रखकर के ख़यालात क़यामत वाले ।।3।।

उसने तनख़्वाह दी आसान सहज कामों की ,

काम लेकर के बड़े सख़्त मशक़्क़त वाले ।।4।।

जिसके लायक़ था वही ओहदा उसने पाया ,

सारे क़ाबिल तो नहीं होते यों क़िस्मत वाले ।।5।।

पहले तो बख़्श ही देते थे ख़ता कैसी भी ,

आज दुनिया में कहाँ दोस्त मुरव्वत वाले ?6।।

अब जिरह मुझसे वो गूँगा भी बहुत करता है ,

उसमें तेवर न पनपते हों बग़ावत वाले ?7।।

छुपके करता था ; लिहाज़ अपना वो जब रखता था ,

अब तो आगे ही करे काम नदामत वाले ।।8।।

(सफ़ाहत=नीचता/कमीनापन , नदामत=लज्जा)

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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