( चित्र Google Search से साभार )

ठाठ से शाही पलंग के नर्म गद्दों पर ॥

लोग करवट ही बदलते रहते है शब भर ॥

नींद आ जाए तो बिस्तर कौन तकता है ,

मैं तो खर्राटे लगाऊँ पेड़ पर चढ़कर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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