अमावस को भी हाँ पूनम की उजली रात लिखता हूँ ॥

न तोड़े जो किसी का दिल कुछ ऐसी बात लिखता हूँ ॥

मगर गाहे बगाहे ही ; हमेशा तो क़सम ले लो ,

सज़ा को मैं सज़ा , सौग़ात को सौग़ात लिखता हूँ ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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