बादल भरी दुपहरी में घनघोर हो गए ॥

बारिश हुई तो पेड़-पौधे मोर हो गए ॥

सूखे से हलाकान थे इंसान औ’ जानवर ,

होकर के तर-बतर मुदित विभोर हो गए ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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