उजड़े हुए चमन की तरह आजकल हूँ मैं ॥

सस्ते घिसे कफ़न की तरह आजकल हूँ मैं ॥

हालत पे अपनी ख़ुद ही मैं भी शर्मसार हूँ ,

इक कुचले नाग फन की तरह आजकल हूँ मैं ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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