( चित्र Google Search से साभार )

जितना चाहूँ मैं रहे चुप वो और भी बमके ।।

बर्क़े याद अब तो साफ़ आस्माँ में भी चमके ।।

रेल के तेज़ गुज़रने पे पुराने पुल सा ,

उससे मिलने को तड़प धाड़-धाड़ दिल धमके ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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