मुक्तक : 237 – इससे बढ़कर के

इससे बढ़कर के क्या तक़्दीर का मज़ाक होगा ? आग से बचके वो पानी से जल के राख होगा ॥ उसको भरते रहे पानी से लबालब हर दिन , क्या पता था कि वो अंदर शकर या खाक होगा ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more