मुक्तक : 240 – पढ़ता नहीं कोई

पढ़ता न कोई हो तो भला क्यों लिखे कोई ? अंधे के वास्ते बताओ क्यों सजे कोई ? होता ज़रूर होगा कुछ तो फ़ायदा वर्ना , कोई सुने न फिर भी अपनी क्यों कहे कोई ? -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

93 : ग़ज़ल – कोई न काम-धाम

कोई न काम-धाम जो करता दिखाई दे ।। हर शख़्स सिर्फ़ ख़्वाब ही तकता दिखाई दे ।।1।। क़ाबिज़ है अफ़रा-तफ़री का माहौल हर तरफ़ , जो भी टहल रहा था वो भगता दिखाई दे ।।2।। हैराँ हूँ डाकुओं के लुटेरों के गाँव...Read more