मुक्तक : 245 – चीख चिल्लाहट है

चीख चिल्लाहट है कर्कश कान फोड़ू शोर है ॥ इस नगर में एक भागम भाग चारों ओर है ॥ सुख की सारी वस्तुएँ घर घर सहज उपलब्ध हैं , किन्तु जिसको देखिये चिंता में रत घनघोर है ॥ -डॉ. हीरालाल...Read more

■ मुक्तक : 244 – अंधों को है

अंधों को गुलिस्तान के दीदार का हुकुम ।। गूँगों को करने भौंरों सी गुंजार का हुकुम ।। ये उलटे हुक़्मराँ जो ठग लुटेरे न्योतते , देते निगेहबाँ को तड़ीपार का हुकुम ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more