मुक्तक : 246 – विष्णु न होकर

विष्णु न होकर लक्ष्मी की अभिलाषा अनुचित है ।   राम हो तो सीता का मिलना यत्र सुनिश्चित है – तत्र सभी अंधे बटेर मन में पाले रखते , शूर्पनखाओं को केवल लक्ष्मण ही इच्छित है !  -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more