विष्णु न होकर लक्ष्मी की अभिलाषा अनुचित है ।  

राम हो तो सीता का मिलना यत्र सुनिश्चित है –

तत्र सभी अंधे बटेर मन में पाले रखते ,

शूर्पनखाओं को केवल लक्ष्मण ही इच्छित है !

 -डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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