पीतल के खरीददार भी होंगे यहाँ न चार ॥

इस शह्र में सोने की लगा मत दुकान यार ॥

अब अस्ल का तो जैसे रहा ही न कामकाज ,

फल-फूल रहा नक़्ल का हर सिम्त कारबार ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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