मुक्तक : 248 – बात बात पर रो पड़ना

बात बात पर रो पड़ना मेरा किर्दार नहीं ।। जिस्म भले कमजोर रूह हरगिज़ बीमार नहीं ।। बचपन से ही सिर्फ चने खाए हैं लोहे के , नर्म-मुलायम कभी रहा अपना आहार नहीं ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more