सब हुए अत्याधुनिक तू अब भी दकियानूस क्यों ?

सबकी चीते जैसी चालें तेरी अब भी मूस क्यों ?

ना सही अंदर से ऊपर से तो दिख शहरी यहाँ ,

सब हैं अप-टू-डेट इक तू ही मिसाले हूश क्यों ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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