उसमें भरपूर जवानी में भी ग़ज़ब बचपन ॥

बाद शादी के भी पैवस्त धुर कुँँवारापन ॥

उसकी चख़चख़ ग़ज़ल है चीख़ कुहुक कोयल की ,

बाद सालों के भी लगती है हाल की दुल्हन ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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