मुक्तक : 238 – बर्फ़ हैं लेकिन

( चित्र Google Search से साभार ) बर्फ़ हैं लेकिन हमेशा दिल जला देते हैं वो ॥ पैर बिन ही पुरख़तर ठोकर लगा देते हैं वो ॥ उनका हर इक काम हैरतनाक अजीबोग़रीब है , अपनी मासूमी के धोखे से दग़ा...Read more

मुक्तक : 239 – पेड़ पे लटका

पेड़ पे लटका आम लगता टपका-टपका सा ॥ आँख फाड़े हुए मैं जागूँ झपका-झपका सा ॥ हर्ष-उत्साह से अनभिज्ञ निरंतर निश्चित , मृत्यु की ओर बढ़ रहा हूँ लपका-लपका सा ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 237 – इससे बढ़कर के

इससे बढ़कर के क्या तक़्दीर का मज़ाक होगा ? आग से बचके वो पानी से जल के राख होगा ॥ उसको भरते रहे पानी से लबालब हर दिन , क्या पता था कि वो अंदर शकर या खाक होगा ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more