चाय भी नाश्ता भी साथ-साथ खाना भी ॥

उसको बख़्शीश भी भरपूर मेहनताना भी ॥

उससे बेहतर हूँ मगर वाहवाही उसको मिले ,

मुझको सूखी पगार डाँँट-डपट-ताना भी ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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