ना हरिश्चंद्र न सुकरात मुझे बनना है ॥

आत्मघाती न हो उतना ही सच उगलना है ॥

फूट जाये न कहीं सर ये छत से टकराकर ,

बंद कमरों में एहतियात से उछलना है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *