जिसने कि ख़ुद ही मुझको गुनहगार किया है ॥

हैरान हूँ उसी ने गिरफ़्तार किया है !

जानूँ न क्यों डुबो रहा है सूखी नहर में ,

नदियों से गहरी-गहरी जबकि पार किया है ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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