अभी धोख़ा नहीं खाया अभी मातम से ख़ाली है ॥

ग़ज़ल कहना तो है लेकिन अभी दिल ग़म से ख़ाली है ॥

खड़ा कर दे जो बहरों के भी कानों को वो कहना है ,

मगर आवाज़ अभी मेरी ये उस दमख़म से ख़ाली है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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