फ़िक्र का अड्डा बेचैनी का ठाँव जमा था ॥

ग़म की बस्ती दुःख का पूरा गाँव जमा था ॥

उस दिन से ही मची थी मुझमें अफ़रा-तफ़री ,

जिस दिन मेरे दिल में इश्क़ का पाँव जमा था ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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