तेरे चेहरे सा न दूजा चौदवीं का माहताब ॥

ढूँढ क्या कोई सकेगा हाथ लेके आफ़्ताब ?

ख़ूबसूरत तू है इतनी , इस क़दर है तू हसीन ,

तेरे आगे सच में जन्नत की भी हूरें लाजवाब ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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