आज कल बिस्तर पे है आराम ही आराम है ।।

इंतिज़ारे मर्ग उसे बस दूसरा क्या काम है ?1।।

छोड़ दो पीना कहें सब छोड़ दो पीना मगर ,

ये न पूछें वो गटकता जाम पर क्यों जाम है ?2।।

यों तमन्नाएँ तो उसके दिल में हैं लाखों मगर ,

जो है उसका हाल वो बस एक का अंजाम है ।।3।।

क़ाबिले ज़िक्र उसने ऐसा काम कब कोई किया ,

फिर उसे ये मिल रहा किस बात का इन्आम है ?4।।

गर करो इंसाफ़ तो फिर छोड़ दो इस बात को ,

आदमी वह कौन है ? कुछ ख़ास है या आम है ।।5।।

जलते रेगिस्तान में पानी का रोना मत मचा ,

इस सफ़र में बूँद भी मटका बराबर जाम है ।।6।।

प्यास मै के एक क़तरे की भी होती सराब सी ,

आदमी पी-पी और उलटा होता तश्नाकाम है ।।7।।

लोग डर डर के इबादत बंदगी करते वहाँ ,

क्या ख़ुदा गुंडा है दहशतगर्द उनका राम है ?8।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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