सुई के रूप में घातक कटार-खंज़र था ॥

वो कोई केंचुआ नहीं विशाल अजगर था ॥

तहों में अपनी वो रखता था डुबोकर सब कुछ ,

वो खड्ड ; खड्ड नहीं था महासमंदर था ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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