मेरे जितने हमसफ़र थे तैशुदा मंज़िल पे हैं ।।

मैं तलातुम में हूँ बाक़ी ख़ुशनुमा साहिल पे हैं ।।

मैं भी उन सा ही था मेहनतकश व ताक़तवर मगर ,

मैं ही क्यों बस गर्त में जब सब महे क़ामिल पे हैं ? 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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