उनके मुख को मुख नहीं बस , लिखते रहे कमल ।।

सपना ही बुनते रहे बस , कहते रहे ग़ज़ल ।।

लेने वाला ले उड़ा जब , पैदल ही चल उन्हें ,

हाथ हिलाते रह गये हम , बस दिल मसल-मसल ।।

 -डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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