नहीं लिखता है तू इक बार लिख मेरी मगरलिखना ॥

ख़ुदा मेरे मेरी तक़दीर दोबारा अगर लिखना ॥

कि जितनी चाय में शक्कर कि आटे में नमक जितना ,

तू बस उतना ही उसमें रंजो-ग़म कम या ज़बर लिखना ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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