मत परायों से न अपनों से न ख़ुद से डरना ॥

जब भी इस राह पे पाँव अपने उठाकर धरना ॥

जब ख़ुदा ही है , है जब रब तो भला डर-छुप क्यों ,

इश्क़ बाक़ाइदा कर-कर के मुनादी करना ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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