बेबस बक़ैद आस्माँ ज़मीं थमी लगे ॥

औरत उदास ग़मज़दा सा आदमी लगे ॥

बदहाल सी लगे तमाम मुल्क़ की फ़ज़ा ,

अब ये निज़ाम तो बदलना लाज़मी लगे ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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