हूँ बुरा तो मुझे बुरा बोलो ।।

ख़ूब मिर्ची-नमक लगा बोलो ।।1।।

जो कहा था वो कर दिखाया है ,

मुझको वादे से मत फिरा बोलो ।।2।।

चुप हो तौहीन जो सहन कर लूँ ,

मुझको बेशर्म-बेहया बोलो ।।3।।

उनको सर्दी की धूप बोलो तो ,

मुझको गर्मी की छाँव सा बोलो ।।4।।

किसको बरबादियों की दूँ तोहमत ,

अपने हाथों न पर मिटा बोलो ।।5।।

गर मैं बोलूँ तो समझो रोता हूँ ,

मेरी चुप्पी को क़हक़हा बोलो ।।6।।

ज़िंदगी जी रहा हूँ मैं जैसी ,

उसको ज़िंदाँ कहो , क़ज़ा बोलो ।।7।।

हूँ नज़रबंद सा मैं मुद्दत से ,

कोई पूछे तो मर गया बोलो ।।8।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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