कुछ ख़तावार , कुछ गुनाहगार होना था ।।

साफ़ होने को कुछ तो दाग़दार होना था ।।1।।

ताज जैसा ही आह ! एक सरफ़रोशोंं का ,

इस जहाँँ में कहीं अजब मज़ार होना था ।।2।।

सच ही होना था कामयाब गर सियासत में ,

खोल में गाय के तुम्हें सियार होना था ।।3।।

कैसे उनपे बरसते ? क्या न पहले से दिल में ,

उनकी ख़ातिर कहीं भरा ग़ुबार होना था ?4।।

पास होनीं थीं उनके कुछ निशानियाँ मेरी ,

मुझपे भी उनका कुछ तो यादगार होना था ।।5।।

मैं तो सौ जान से रहूँ सदा फ़िदा उन पर ,

मुझपे उनको भी ऐसा जाँनिसार होना था ।।6।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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