( चित्र google search से साभार )

ऐसा नहीं कि उससे मेरा ग़म था कहीं कम ॥

मैं नाचता था वो मनाता रहता था मातम ॥

तक्लीफ़ में ख़ुश रहने का फ़न मुझको था पता ,

वो लुत्फ़ो-मज़ा में भी ढूँढ लेता था इक ग़म ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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