बेबस हो वो ख़रीदे मुँहमाँगे दाम में ॥

जो चीज़ रोज़ आती इंसाँ के काम में ॥

गोदाम में कर सूरज को क़ैद बेचें वो ,

एक-एक किरन इक-इक सूरज के दाम में ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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