रेग्ज़ारों की बियाबाँ की हर डगर घूमा ॥

तनहा-तनहा,गली-गली,शहर-शहर घूमा ॥

मेरी तक़्दीर कि तक़्दीर में जो था ही नहीं ,

जुस्तजू में मैं उसी की ही उम्र भर घूमा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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