■ मुक्तक : 348 – जिसका जैसा नसीब Posted on September 25, 2013 /Under मुक्तक /With 0 Comments जिसका जैसा नसीब होता है ॥ उसको वैसा नसीब होता है ॥ मुफ़्लिसी गर लिखी हो क़िस्मत में , किसको पैसा नसीब होता है ? -डॉ. हीरालाल प्रजापति 5,269