मैं नहीं कह सकता……………..

मुझे मान्य है ।

सर्वथा मान्य है ।

आप जो कहते रहते हो प्रायः –

मात्र बेटों के पिता होने के बावजूद

बेटियों के बारे में ।

कि बेटियाँ ‘ये’ होती हैं ,

बेटियाँ ‘वो’ होती हैं ।

( ‘ये’ और ‘वो’ से यहाँ तात्पर्य

उनकी अच्छाइयाँ मात्र से है )

निरे अपवाद छोड़कर यही सच भी है

किन्तु

जिसे आप डंका बजा-बजा कर कह सकते हो

मैं वह सब नहीं कह सकता !

हरगिज़ नहीं कह सकता !

जबकि आपकी कविताओं में चित्रित ,

कहानियों , उपन्यासों में वर्णित

महान बेटियों से कहीं बढ़कर ही

मैंने सदैव उन्हे पाया है ।

क्योंकि ,

यदि जो आप कहते हैं

वही मैं भी बोलने लगूँ तो

इसे पक्षपात ही समझा जाएगा ।

मात्र बेटियों का बाप जो हूँ ।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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