( चित्र Google Search से साभार )

ख़ुशहाल दिल को जब्रन नाशाद करके रोऊँ ।।

आबाद ज़िंदगानी बर्बाद करके रोऊँ ।।

क्या हो गया है मुझको उस सख़्त-बेवफ़ा को ,

मैं क़ब्र में पहुँचकर भी याद करके रोऊँ ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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