बड़े अदब ब क़ाइदा बहुत करीने से ।।

कभी दीवार ओ दर से टिक तो गाह ज़ीने से ।।

न आज चीन्ह भी रहे उसे जिसे कल तक ,

लगाया था हज़ार बार अपने सीने से !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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