इतनी आबादी न थी तब आदमी था क़ीमती रे ।।

अब तो बकरे से भी सस्ती आदमी की ज़िंदगी रे ।।1।।

क्यों किये जाता है पैदा आदमी बच्चों पे बच्चे ,

पालना मुश्किल है जब महँगी में इक औलाद भी रे ।।2।।

अस्तबल में देखिए कूलर लगे , ए.सी. लगे सच ,

और घर में फुँँकता गर्मी में ग़रीब आम आदमी रे ।।3।।

इक अनार और सैकड़ों बीमार हों कुछ इस तरह की ,

आजकल सचमुच ही ज़ालिम चीज़ है ये नौकरी रे ।।4।।

पहले ख़ातिरदारी रिश्तेदारों की होती थी रब सी ,

अब तो मेहमानों से सबको जैसे चिढ़ सी हो गयी रे ।।5।।

यूँ तो हैं पहचान के इस शह्र में मेरे हज़ारों ,

सच कहूँ लगता नहीं अपना मुझे एकाध भी रे ।।6।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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