यादों में तेरी नित पड़-पड़ कर , जीवन का भुलक्कड़ बन बैठा ।।

सुख-शांति भरे सुंदर मुख पर , ज्यों सुदृढ़ मुक्का हन बैठा ।।

मति मारी गई जो न होती मेरी , तेरी नयन-झील में न डूबता मैं ,

सबसे जिसको था बचाए रखा , तुझे कर वो समर्पित मन बैठा ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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