( चित्र Google Search से साभार )

होने को ख़ुश या रोने को उदास लोग बाग ।।

क्या क्या लगाते रहते हैं क़ियास लोग बाग ?

अंजाम कुछ भी अपने हाथ में नहीं वलेक ,

तकते हैं सब लकीरें आम-ओ-ख़ास लोग बाग ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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