नींद का चोर आज रात ख़ुद नहीं सोया ॥

दर्द दे खिलखिलाने वाला सुबक कर रोया ॥

क्या हुआ ? क्यों हुआ ? ये बात तो वही जाने ,

बस सुकूँ ये कि लुटेरे का भी कुछ तो खोया ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *