बिन कुछ किए धरे वो होते जाएँ क़ामयाब ?

हम लाख उठा-पटक करें न कुछ हो दस्तयाब ।।

दिल भी जलाएँ हम तो दूर हो न अंधकार ,

वो जुल्फ़ ही सँवार दें तो ऊगें आफ़्ताब !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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