चाहता हूँ कि मेरे दिल में तेरी मूरत हो ।।

तू किया करती मेरी रात-दिन इबादत हो ।।

लैला-मजनूँ से हीर-राँझे  से कहीं बढ़कर ,

दुनिया-ए-इश्क़ में अपनी बुलंद शुहरत हो ।।

डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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