इतना अमीर था वो ऐसा मालदार था ,

धन का कुबेर उसके आगे ख़ाकसार था !

ताउम्र फिर भी क्यों कमाई में लगा रहा ,

धेला भी जिसका ख़र्च बस कभी कभार था ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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