प्यार उनका मेरा और गहरा हुआ ।।

और साकित समंदर सा ठहरा हुआ ।।1।।

इस तरह कुछ हुए हादसे दोस्तों ,

उनकी होली तो अपना दशहरा हुआ ।।2।।

मुझको सदमा हुआ मेरे गिरने पे जब ,

दोस्त का लोहा चेहरा सुनहरा हुआ ।।3।।

उसके ही साथ सब साज-सुर उठ गये ,

अब यहाँ रात-दिन चुप का लहरा हुआ ।।4।।

“मुझसे हरगिज़ नहीं प्यार करते हैं ” वो ,

यूँ वो चीखे कि मैं सुन के बहरा हुआ ।।5।।

कब तक उनको मनाऊँ कि मटिआला अब ,

उनका हर नाज़-नख़रा सुनहरा हुआ ।।6।।

अपनी हर बात पहले बताते थे वो ,

अब तो पेट उनका खाई से गहरा हुआ ।।7।।

अब वो डरते हैं दीपावली में बहुत ,

उनका बच्चा धमाकों से बहरा हुआ ।।8।।

-डॉहीरालाल प्रजापति

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