( चित्र Google Search से साभार ) 

क्या फ़ायदा कि चुप हो गज भर ज़बान रखकर ?

सुनते नहीं अगर तुम हाथी से कान रखकर ॥

आँखें हैं पर न देखो , सिर धर के गर न सोचो !

फिर तुम तो चलता फिरता मुर्दा हो जान रखकर ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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