ना जाने क्यों ख़ामोशी भी शोर-शराबा लगती है ?

मरहम-पट्टी-ख़िदमतगारी ख़ून-ख़राबा लगती है ॥

ख़ुद का जंगल उनको शाही-बाग़ से बढ़कर लगता है ,

मेरी बगिया नागफणी का सह्रा-गाबा लगती है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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