आज तो कुछ भी नहीं मुझसे छिपाया जाएगा ।।

राज़-ए-दिल का बोझ अब ना और उठाया जाएगा ।।1।।

मैं तमन्नाई नहीं राहें मेरी फूलों की हों ,

हाँ बिना जूतों के काँटों पे न जाया जाएगा ।।2।।

हाथ भी जोड़े न वो जो सच ख़ुदा के सामने ,

उस से क्या इंसाँ के दर पे सर झुकाया जाएगा ?3।।

ख़ूबरू ना नौजवाँ , ना नामचीं , न रईस मैं ,

उस हसीं का किस बिना पर दिल चुराया जाएगा ?4।।

बस यूँ ही करले यकीं दिल में तेरी तस्वीर है ,

चीर कर दिल को भला कैसे दिखाया जाएगा ?5।।

मुल्क़ से बेरोज़गारी में ये हिज़रत के ख़याल ,

प्यार यूँ कब तक वतन से रह निभाया जाएगा ?6।।

भैंस से लेने चले हो दाद तुम भी बीन की ,

स्वाद क्या अदरख का बंदर से बताया जाएगा ?7।।

मर चुका था वो तो अंदर से बहुत पहले मगर ,

आज तन से भी गया दम तो जलाया जाएगा ।।8।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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