मुक्तक : 494 – ताक़त के साथ-साथ

ताक़त के साथ-साथ में रखते हों शरफ़ भी ।। क्या इस जहाँ में अब भी इस क़दर हैं हिम्मती ? गर जानता हो कोई तो फ़ौरन बताये मैं – महलों में उनको ढूँढूँ या खोजूँ कुटी-कुटी ? -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 493 – हँसने की आर्ज़ू में

हँसने की आर्ज़ू में ज़ार रो के मरे  है ॥ खा-खा के धोखा खामियाजा ख़ास भरे है ॥ अहमक़ नहीं वो नादाँ नहीं तो है और क्या ? इस दौर में उम्मीदे वफ़ा जो भी करे है ॥ -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more

मुक्तक : 492 – बतलाओ न दो-चार नहीं

( चित्र Google Search से साभार ) बतलाओ न दो-चार नहीं सैकड़ों दफ़ा ॥ तारी किये हैं तुमने मुझपे ज़ुल्म और जफ़ा ॥ फिर भी किये ही जाऊँ तुमसे इश्क़ और वफ़ा ॥ होता नहीं हूँ क्यों कभी भी बरहम...Read more

मुक्तक : 491 – है गर तवील ज़िंदगी

( चित्र Google Search से साभार ) है गर तवील ज़िंदगी की तुझको सच में चाह ।। दूँगा मैं तुझको सिर्फ़ोसिर्फ़ एक ही सलाह ।। है क्योंकि हक़परस्त तू ले इसलिए ये मान , मत सुर्ख़ को कहना तू सुर्ख़,स्याह को...Read more

119 : ग़ज़ल – जबकि दिल आ गया

जबकि दिल आ गया किसी पर है ।। कैसे फिर कह दूँ हाल बेहतर है ?1।। बस किसी और से तू कहना मत , बात हालाँकि ये उजागर है ।।2।। उसको साबित किया गया है सच , पर वो झूठा-ग़लत सरासर है ।।3।।...Read more

मुक्तक : 490 – चुप-चुप रहने वाला

( चित्र Google Search से साभार ) चुप-चुप रहने वाला आगे बढ़-बढ़ बोले ।। नये-नये नायाब बहाने गढ़-गढ़ बोले ।। ये हैरतअंगेज़ कारनामा वो करता , जिसके सिर पर जादू इश्क़ का चढ़-चढ़ बोले ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापति Read more